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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीति करने में माहिर हो गए हैं। देश की जनता को बेवकूफ कैसे बनाना है, इसमें तो मोदी ने पीएचडी ही कर ली है। मोदी समझते है कि यह तो भारत देश है, भारत के लोग को अनपढ़-गंवार होते हैं तो उन्हें क्या पता। लेकिन मोदी को इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं है कि जिस देश की जनता ने उन्हें पीएम बनाया है, उसी देश की जनता उसे दोबारा चाय वाला बनाने में समय नहीं लगाएगी।

इन दिनों गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) का मुद्दा काफी गर्माया हुआ है। मोदी अड़े हुए हैं कि 1 जुलाई से हर हाल में देश भर में जीएसटी लागू कर दिया जाएगा। लेकिन उससे पहले जब मोदी खुद सत्ता में नहीं थे तो मोदी ने जीएसटी का जमकर विरोध किया था। मोदी का कहना था कि, “भारत जैसे देश में जीएसटी किसी भी हाल में सफल नहीं होगा।”

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केंद्र सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स बिल को प्रस्तुत करने के लिए काफी जद्दोजहद की है। मगर अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जीएसटी बिल को पारित करवाकर ही दम लेगी। यदि ऐसा होता है तो फिर यह केंद्र सरकार की एक बड़ी सफलता होगी। इस बिल को बड़ा इकोनाॅमिक रिफाॅर्म माना जा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जीएसटी का पहले के दौर में विरोध कर चुके हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उठाया था जीएसटी का मुद्दा
तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात, नरेंद्र मोदी ने जीएसटी का विरोध किया था उनका कहना था कि इस विधेयक के कारण उन्हें 14 हजार करोड़ रूपए का नुकसान उठाना पड़ जाएगा। गौरतलब है कि वर्ष 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने जीएसटी की बात सामने रखी थी।

उस दौर में वित्तमंत्री पद आसिम दासगुप्ता के पास था। कमेटी को गुड्स एंड सर्विस टैक्स को लेकर पूर्ण प्लान तैयार किया गया था। बाद में अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2003 में विजय केलकर के नेतृत्व में टैक्स रिफाॅर्म हेतु टास्क फोर्स का गठन किया था।


इस बैठक में रिज़र्व बैंक आॅफ इंडिया के पूर्व गवर्नर आईजी पटेल, विमल जालान व सी रंगराजन आदि सम्मिलित थे। इस मामले में बैठक आयोजित हुई थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटबिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई बैठक के बाद समिति बनाई गई थी और इसी समिति ने जीएसटी को लेकर कार्य किया था। कमेटी ने कर सुधार टास्क फोर्स का गठन कर इस दिशा में कार्य किया था।