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समाज में मुसलमानों की छवि खराब करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। जब भी कभी आतंकवाद या आतंकी हमले की बात आती है तो सबसे पहले मुस्लिमों पर शक किया जाता है। एयरपोर्ट में हर एक मुस्लिम शख्स की ऐसी चेकिंग की जाती है जैसे वो सचमुच में आतंकदी हों। यह सरेआम मुस्लिमों की निंदा है। इसी बात की निंदा श्री आचार्य ओंकारानंद ने भी की है।

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भारत में मुसलमान कम नहीं है जो इस्लाम को मानते
श्री आचार्य ओंकारानंद ने प्रोग्राम के दौरान कहा कि लोग कहते है इस्लाम आतंकवादी है। अगर आप एक मिनट के लिए ये मान ले की इस्लाम आतंकवादी है तो भारत में मुसलमान कम नहीं है जो इस्लाम को मानते है तो पूरा विश्व समाप्त होने में बस एक दिन लगना है अगर हम ये सोच ले की हम आतंकवादी है ! उन्होंने कहा बल्कि हम धार्मिक है हम अपने धर्म को बचाने के लिए आगे आते है।  मुस्लिम नौजवानों ने भी की निंदा
हालांकि देश के मुस्लिम नौजवानों का कहना है कि इस्लाम में चरमपंथ की कोई जगह नहीं है और वे इस तरह की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। रुख़सार अंजुम हैदराबाद के एक यूनिवर्सिटी की छात्रा हैं। उनका कहना है, “हम आतंकवाद का किसी भी सूरत में समर्थन नहीं करते हैं। यहां आतंकवाद में मुसलमानों का नाम लिया जाता है लेकिन मुसलमानों का आतंकवाद से दूर-दूर का कोई संबंध नहीं है।”

हैदराबाद के ही पुराने इलाके के एक नौजवान अब्दुल अज़ीम ख़ान ने बताया, “जब भी कोई चरमपंथी घटना होती है उसमें मुसलमानों का नाम सामने आता है, पहले उनका नाम आईएसआई से जोड़ा जाता था।

फिर इंडियन मुजाहिदीन से जोड़ा गया, फिर सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के नाम से और अब आईएस (इस्लामिक स्टेट) के नाम से जोड़ा जाता है। अभी हाल ही में हैदराबाद से सात बच्चों को उठा लिया गया और उनका संबंध इस्लामिक स्टेट से बताया जा रहा है। यह मुसलमानों की छवि खराब करने की कोशिश है।